दूध क्रांति का जनक किसी कहा जाता है?
"दूध क्रांति" या भारत में दुग्ध क्रांति का श्रेय अक्सर डॉ. वर्गीज कुरियन को दिया जाता है, जिन्हें भारत में "श्वेत क्रांति का जनक" भी कहा जाता है। वह एक भारतीय सामाजिक उद्यमी और गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (GCMMF) के संस्थापक-अध्यक्ष थे, जो दूध और डेयरी उत्पादों के अमूल ब्रांड का विपणन करता है।
डॉ. कुरियन ने 1946 में भारत में पहली दुग्ध सहकारी समिति, आनंद मिल्क यूनियन लिमिटेड (AMUL) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने गुजरात राज्य में दूध उत्पादन बढ़ाने और छोटे डेयरी किसानों की आजीविका में सुधार करने में मदद की। उन्होंने 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की स्थापना में भी मदद की, जिसने भारत के अन्य हिस्सों में अमूल मॉडल की सफलता को दोहराने में मदद की।
डॉ कुरियन के प्रयासों से भारत में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और भारत को दूध की कमी वाले देश से दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देश में बदलने में मदद मिली, इस प्रकार इस आंदोलन को "श्वेत क्रांति" नाम दिया गया। डेयरी क्षेत्र में उनके काम ने लाखों छोटे डेयरी किसानों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद की, और यह आज भी भारत और अन्य विकासशील देशों में ग्रामीण विकास के लिए एक मॉडल बना हुआ है।
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